मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

वजन घटाने के लिए कुछ ज़रूरी बातें





यदि आप वजन वृद्धि अर्थात मोटापे से परेशान हैं, तो वजन घटाने के लिए वजन प्रबंधन अपनाकर अपना वजन कम करें वरना इसके घातक नतीजे भी हो सकते हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोटापे को बीमारी करार दिया है। अमरीकन इंश्योरेंस कंपनियां कुल ४५ बिलियन अमरीकी डॉलर मोटापाजनित बीमारियों पर प्रतिवर्ष खर्च कर रही है। मोटापे से बीमारियों के साथ कार्यहानि भी होती है।
वजन वृद्धि और मोटापा जनित बीमारियां अत्यंत घातक होतीं हैं | मोटापा से मधुमेह, रक्तचाप, हृदयाघात, मष्तिष्क आघात, कैंसर, अनिद्रा, जोड़ों एवं घुटनों की बीमारियां आदि होती हैं। अक्सर लोग वजन कम करने के लिए ब्यूटी क्लिनिक में जाते हैं। इस तरह के क्लिनिक चलाने वाले लोगों को वेट मैनेजमेंट का कोई अनुभव नहीं होता। अनाडि़यों की देखरेख में वजन कम करने की कोशिशें आपको शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं ।

वर्तमान समय में अमेरिका के खाद्य व औषधि प्रशासन ने वजन घटाने की मात्र एक दवा ओर्लिस्टेट नामक दवा को मंजूरी दी हुई है और लगता है कि उस पर भी प्रतिबंध लगाने की नौबत आ जाएगी।ओर्लिस्टेट नामक इस दवा के घातक साइड प्रभावों के मद्देनजर यह माँग बलवती होती जा रही है कि इस पर प्रतिबंध लगाया जाए।
ओर्लिस्टेट का रासायनिक नाम टेट्राहाइड्रोलिपटेटिन है और इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह वजन बढ़ने से रोकती है। दरअसल ओर्लिस्टेट पैंक्रियाज के एक एंजाइम लाइपेज के अवरोधक एंजाइम का थोड़ा संशोधित रूप है।वह लाइपेज अवरोधक है लिपस्टेटिन और इसे एक बैक्टीरिया से प्राप्त किया गया है। लाइपेज हमारी आँतों में वसा के अवशोषण में मदद करता है। जब लाइपेज की क्रिया बाधित होती है, तो आँतों में वसा का अवशोषण नहीं हो पाता। यानी आपको उतनी ऊर्ज़ा नहीं मिलती और फलस्वरूप आप दुबले होने लगते हैं । जब यह दवा बाजार में आई थी तो इसका एकमात्र साइड प्रभाव यह बताया गया था कि आँतों में वसा का अवशोषण नहीं होने की वजह से वह वसा मल के साथ निकलती है और मल बहुत चिकना हो जाता है। मगर जब दवा का इस्तेमाल शुरू हुआ और विपणन-उपरांत अध्ययन शुरू हुए तो अन्य साइड प्रभाव सामने आने लगे। सबसे पहले पता चला कि ओर्लिस्टेट (ब्रांड नाम जेलिकेन या एली) के सेवन से लिवर को बहुत नुकसान होता है।

वजन कम करने के कुछ कारगर उपाय---
हम सब भी यही चाहते हैं कि हमारे शरीर का भार नियंत्रित हो ताकि हम खूबसूरत दिखने के साथ-साथ अपने कार्य को भी आसानी से संपादित कर पाएँ।
उसके लिए कुछ कारगर उपाय विभिन्न पद्धतियों का सहारा लिया जा सकता है |

आयुर्वेद पद्धति द्वारा इलाज़:--
आयुर्वेद में इलाज मुख्यत : जड़ी-बूटियों पर आधारित होता है। यह करीब - करीब नेचरोपैथी जैसा ही है। इसमें भी मसाज और स्टीम बेस्ड तकनीक होती है। मसाज के लिए अदरक , कुलष्ठा व दूसरी बूटियों मिला तेल या पाउडर इस्तेमाल किया जाता है। फिर स्टीम दी जाती है। खास पैक भी लगाया जाता है। इन सब तरीकों से अतिरिक्त वसा (फैट) पिघल जाता है। आयुर्वेद में आमतौर पर १०-१५ सिटिंग में पांच किलो तक वजन घट सकता है। इस इलाज़ की प्रक्रिया हेतु ५ हजार से २० हजार रुपये तक आपसे लिए जाते हैं। इसका फायदा यह है कि शरीर ढीला नहीं पड़ता और वजन भी अचानक वापस नहीं आता। चिकित्सक की सलाह से त्रिफला , आयोग्यवर्धिनी , घृतकुमारी आदि दवाएं भी ले सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार रात भर ताम्बे के पात्र में यदि पानी छोड़ दी जाय और सुबह खाली पेट पीया जाये तो इससे कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है |

होम्योपैथी पद्धति द्वारा इलाज़:--
दिन में तीन बार 10-15 बूंदें फायटोलका डिकंड्रा क्यू (Phytolaca Decandra Q) या फ्यूकसवेस क्यू (Fuccus Ves Q) चौथाई कप पानी में लें। कैल्केरिया कार्ब (Calc.Carb.) की 4-5 गोलियां भी दिन मे तीन बार ले सकते हैं । ये दवाएं फैट कम करती हैं और नियमित लेने पर दो - तीन महीने में असर दिखने लगता है। इन दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं है , फिर भी होम्योपैथ की सलाह से लेना बेहतर है ।

मशीनों की पद्धति द्वारा इलाज़:--
साइंटिफिक तकनीक में मशीनों द्वारा मसल एक्टिविटी , ब्लड सर्कुलेशन और शरीर की लचक बढ़ाई जाती है। 
(१)मॉर्निंग वॉकर मशीन  द्वारा इलाज़:-- वजन कम करने और हाई बीपी , डायबीटीज जैसी तमाम बीमारियों को दूर करने मेंमॉर्निंग वॉकर मशीन को काफी मददगार माना जाता है। रोजाना कुछ देर के लिए इसका इस्तेमाल कर दिन की शुरुआत की जा सकती है। 
(२)वाइब्रेशन  द्वारा इलाज़:-- मशीन के जरिए शरीर पर वाइब्रेशंस दी जाती हैं। इससे मांसपेशियों की एक्टिविटी बढ़ती है ,जिससे फैट बर्न होता है। 
(३)हीट थेरपी द्वारा इलाज़:-- आपके शरीर पर पैड लपेटकर हीट दी जाती है। इससे शरीर का ताप बढ़ जाता है , जो बेसिकमेटाबॉलिज्म रेट में इजाफा करता है। 

उपर्युक्त तरीकों में दूसरे और तीसरे तरीकों से वजन कम करने से आपकी त्वचा ढीली होने का खतरा होता है। उसके लिए मसाज की सलाह दी जाती है। मशीनी तरीकों से वजन कम करने के लिए दो से तीन हजार रुपये चार्ज किए जाते हैं। 

घरेलू पद्धति द्वारा इलाज़:--
(१)भोजन में गेहूं के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है १० किलो चना व २ किलो जौ मिलाकर इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएं। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
(२)प्रातः एक गिलास ठंडे पानी में २ चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है। दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी। 
(३)पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन १० मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।
(४)सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रातः २-३ किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें। 
(५)सेब स्वास्थ्य और सौंदर्य दोनों के लिए फायदेमंद होता है। यदि आप रोज सुबह उठकर नियम से एक सेब खाने की आदत डालेंगे तो इससे आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और सौंदर्य भी। 
(६)सूप से यदि आप अपने डिनर की शुरुआत करते हैं तो यह आपका मोटापा कम करने में कारगर सिद्ध होगा। सूप की खासियत यह होती है कि यह आपको भूख से तृप्ति दिलाने के साथ-साथ दूसरे भोजन की चाहत कोकम कर देता है। 
(७) टेलिविज़न देखते समय भी यदि आप कमरे में इधर-उधर टहलते हैं तो यह आपके लिए फायदेमंद होगा।
(८)धीरे-धीरे व चबा-चबाकर भोजन करने से आपके भोजन का पाचन अच्छे से होता है तथा आपको बार-बार भूख भी नहीं लगती है।
(९) सामान्य मान्यता के अनुसार लाल मिर्च को सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता, लेकिन ब्रिटेन में हुए एक शोध में दावा किया है कि यह शरीर में व्याप्त अवांछित कैलोरी जलाने में मददगार साबित हो सकता है। शोध का नेतृत्व करने वाले पर्डयू यूनीवर्सिटी में खान-पान एवं पोषण के प्रोफेसर रिचर्ड मैट्स का कहना है, "हमने पाया कि लाल मिर्च खाना मोटापा कम करने और भोजन के बाद अधिक कैलोरी जलाने में मददगार हो सकता है।" यह शोध 'फिजियोलॉजी एंड बिहेवियर' पत्रिका में प्रकाशित हुई है।
इसके अतिरिक्त अन्य शोधों में पाया गया है कि मिर्च में मौजूद कैप्सासिन तत्व, जो मिर्च को गर्मी देता है, भूख कम कर सकता है और कैलोरी को जलाते हुए ऊर्जा की खपत बढ़ा सकता है। ताज़ा शोध में लाल मिर्च के मसाले की मात्रा की भी चर्चा की गई है। इसके अनुसार एक ग्राम या आधा चम्मज लाल मिर्च का पावडर बहुत से लोगों के लिए स्वीकार्य है।शोध में सामान्यत: सूखे लाल मिर्च को शामिल किया गया।


सर्जरी और चिकित्सीय थेरपी द्वारा इलाज़:--
बेहद मोटे लोगों यानी जिन्हें 35-40 किलो वजन घटाना होता है , वे सर्जरी करा सकते हैं। 
(अ) लाइपोसक्शन या लाइपो-आर थेरपी द्वारा इलाज़:--यह थेरपी किसी एक हिस्से से फैट घटाने में मददगार होती है। मसलन अगर पेट पर ज्यादा चर्बी है तो फौरन एक - दो इंच तक पेट कम हो जाता है। महीने भर में कुल तीन इंच तक का फर्क हो सकता है।इसमें किसी तरह का कट या सर्जरी नहीं होती। इसमें १० से १५ हजार रुपए खर्च आता है। इसमें शरीर से फालतू फैट को निकाला जाता है। 
(ब) बैरिएट्रिक सर्जरी : इस सर्जरी को करने के कई तरीके हैं। इनमें जो सबसे पॉप्युलर है , उसमें पेट के साइज कोकम कर दिया जाता है , जिससे कम खाने के बाद ही इंसान की संतुष्टि हो जाती है। यह सर्जरी उन लोगों के लिएहै जो बहुत ज्यादा मोटे हैं और जिन्हें मोटापे की वजह से डायबीटीज और हाई बीपी जैसे समस्याओं ने घेर रखाहै। कुछ समय पहले बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इसी सर्जरी को कराया था। 
(स) स्टमक बाइपास : पेट में एक पाउच बनाकर सीधे इंटेस्टाइन से जोड़ दिया जाता है। इससे ज्यादा कैलरीएब्जॉर्ब नहीं होती। 
(द) सिलिकॉन बैंड : पेट में सिलिकॉन बैंड फिट कर दिया जाता है। इससे पेट भरा लगता है और भूख कम लगतीहै। 

उम्र और मोटापा का बहुत गहरा सम्बन्ध होता है | ५० साल के आसपास का समय महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इस उम्र में अकसर मोटापा आनेलगता है। दरअसल , महिलाओं में इस उम्र में मासिक धर्म बंद होने वाला होता है और उनकी हॉर्मोंस प्रक्रिया मेंबदलाव आने लगता है। इस उम्र में थकावट आदि रहने से महिलाएं आरामपरस्त हो जाती हैं और उनके शरीर का वजन धीरे धीरे बढ़ने लगता है। दूसरी तरफ पुरुषों को इस उम्र में दमा , खांसी , गठिया , जोड़ों का दर्द आदि हो जाते है , जिससे उनकी जिंदगी घर के दायरे में ही सिमटकर रह जाती है। यह स्थिति उनके मोटापे का कारण बन जाती है। ऐसे लोगों को चाहें वह महिलाएं हों या पुरुष घर के अंदर ही थोड़ी बहुत एक्सरसाइज , योगासन , प्राणायाम करते रहना चाहिए ,जिससे वजन पर कंट्रोल रखा जा सके। 
कैलरी की जरूरत का विवरण:--
उम्र
रोजाना जरूरी कैलरी
एक साल तक
100 कैलरी प्रति किग्रा शरीर के वजन के मुताबिक
1-3 साल
1200
4-6 साल
1500
7-9 साल
1800
10-12 साल
2100
13-15 साल (लड़के)
2500
13-15 साल (लड़की)
2200
16-18 साल (लड़के)
3000
16-18 साल (लड़की)
2200
पुरुष (हल्की मेहनत करने वाले)
2200
पुरुष (भारी मेहनत करने वाले)
3400
महिलाएं (हल्की मेहनत करने वाली)
1900
महिलाएं (भारी मेहनत करने वाली)
2800



















आपको अपने भोज्य पदार्थों में यह ध्यान रखना होगा कि किसके बजाय क्या खाएं :--
(१)-वाइट ब्रेड सैंडविच के बदले / होल वीट या ब्राउन ब्रेड
(२)-भरवां परांठा के बदले / भरवां रोटी
(३)-पुलाव / बिरयानी / वाइट राइस के बदले...... ब्राउन राइस ( मांड निकला)
(४)-समोसे / पकौड़े के बदले इडली / उपमा / पोहा
(५)-मिठाई के बदले गुड़ / सूखे मेवे
(६)-कोल्ड ड्रिंक के बदले नारियल पानी / नीबू - पानी
(७)-दूध वाली चाय के बदले हर्बल टी / लेमन टी
(८)-फुल क्रीम दूध के बदले डबल टोंड दूध
(९)-जूस के बदले संतरा / मौसमी
(१०)-मीठी लस्सी के बदले छाछ
(११)-पनीर के बदले टोंड मिल्क से बना पनीर / टोफू
(१२)-अंडा ( फुल ) के बदले अंडे का सफेद हिस्सा

हम अपने दैनिक जीवन में कुछ ऐसी गलतियां करते रहते हैं, जो  वजन बढ़ाती हैं |
(१)- कम या खूब खाने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण:- कुछ लोगों को लगता है कि बार - बार खाने से बेहतर है , दिन में सिर्फ तीन बार खाना। ऐसे में ज्यादा भूख लगती है और लोग ज्यादा कैलरी ले जाते हैं। मसलन अगर ब्रेकफास्ट सुबह ९ बजे और लंच दोपहर २ बजे लेंगे तो भूख ज्यादा लगेगी और लंच में ज्यादा खाना खाएंगे। बीच में ११ या ११:३० बजे अगर फल या ड्राइफ्रूटस या कोई और कम कैलोरी की स्वास्थ्यवर्धक चीज खा लेंगे तो लंच में खाना कम खाएंगे । रात्रि-भोज में भोजन का आधिक्य  भी वजन बढ़ने की अहम वजहों में से है। रात में हल्का खाना खाएं।
(२)- दावत में खाने पर संयम:- कई लोग हफ्ते में पांच - छह दिन डाइटिंग करते हैं , मसलन लिकविड डाइट पर रहते हैं , फल सब्जी खाते हैं पर सप्ताहांत पर जमकर खाते हैं। उन्हें लगता है कि एक दिन खुलकर खाने से क्या फर्क पड़ता है। यह सही नहीं है। इससे पूरे हफ्ते का संयम बेकार जाता है और एक ही दिन में हफ्ते भर में की कैलरी शरीर में लौट आती हैं।
(३)- मीठा और मिठाई से बचाव:- ज्यादातर लोगों के घर में खाने के बाद मीठे का चलन है। यह कॉम्बिनेशन और कैलरी , दोनों लिहाज से गलत है। गलत कॉम्बिनेशन इसलिए कि भारी कारबोहाइड्रेट या फैट के बाद शुगर नहीं खाना चाहिए। साथ ही मिठाई में मौजूद कैलरी सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। खाने के बाद मीठे का मन है तो गुड़ ले लें , लेकिन कम। गुड़ में मौजूद आयरन सेहत के लिए अच्छा है। सौंफ और किशमिश ले सकते हैं। सौंफ खाना पचाने में मदद करती है और किशमिश सीधे ग्लूकोज में नहीं बदलती।
(४)- शुगर-फ्री या डाइट के प्रयोग से बचाव:- आजकल शुगर-फ्री या डाइट आइटम फैशन में हैं। कई लोग नेचरल शुगर न लेकर 
शुगर-फ्री  लेते हैं। इससे वे चीनी के जरिए मिलनेवाली कैलरी से तो दूर रहते हैं पर लंबे वक्त तक  शुगर-फ्री  लेना अच्छा नहीं है।  शुगर-फ्री  आइटम्स में आर्टिफिशल चीजें होती हैं , जिन्हें लंबे समय तक नहीं खाना चाहिए।
(५)- बीच-बीचमें छुटपुट खाने (बिंज ईटिंग) की आदत :- एक टॉफी या चॉकलेट से क्या होता है , यह बात अक्सर लोग बोलते हैं , लेकिन यही छोटी चीजें मोटापे की वजह बनती हैं। हाई कैलरी स्नैकिग ( पकौड़े , समोसे , नमकीन , बिस्कुट आदि ) और बिंज ईटिंग (बीच-बीचमें छुटपुट खाना) की आदत वजन बढ़ने की बड़ी वजहों मे से हैं। जो लोग चॉकलेट के शौकीन हैं , वे डार्कचॉकलेट की बजाय वेफर वाली चॉकलेट खाएं। स्नैक्स में मुरमुरे , रोस्टेड ( भुने हुए ) स्नैक्स या नॉर्मल पॉपकॉर्न ले सकते हैं।

आपके वजन घटाने के लिए कुछ ज़रूरी ध्यान रखने योग्य बातें निम्नलिखित प्रकार से हैं |
(१)वजन घटाने के लिए सही वक्त पर सही खाना बेहद जरूरी है।
(२)तीनों वक्त खाना खाएं
(३)अगर वजन घटाना चाहते हैं तो सबसे पहले जरूरी है कि कोई भी खाना छोड़ें नहीं। तीन प्रॉपर मील और बीच में दो स्नैक्स जरूर लें। कोई खाना छोड़ेंगे तो अगली बार ज्यादा खाएंगे , जो सही नहीं है।
(४)शुगर , जंकफूड , फास्ट फूड , मिठाइयां खाने की लिस्ट से निकाल दें। कैंडी , जेली , शहद , मिठाई और सॉफ्टड्रिंक्स से दूर रहें। इसी तरह बिस्कुट, केक, पेस्ट्री में काफी फैट और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट होता है , जो मोटापा बढ़ाता है। चीनी ज्यादा नहीं खानी चाहिए। ५ ग्राम (१ चम्मच ) चीनी में २० कैलरी होती हैं।
(५)खाने में ऊपर से नमक न मिलाएं। नमक शरीर में पानी को रोकता है , इसलिए ज्यादा नमक से बचना चाहिए।दिन भर में पांच ग्राम ( करीब एक चम्मच ) नमक काफी होता है। इसमें सब्जी आदि में डाला गया नमक भी शामिल है। दो चम्मच नमक से ज्यादा बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। कोशिश करें कि रात मे १० बजे के बाद नमक न लें। सलाद , रायता , ड्राई - फ्रूट्स , नीबू - पानी आदि में नमक से परहेज करे और टेबल सॉल्ट से दूर रहें। हेल्दी खाने का मतलब फीके खाने से नहीं है।
(६)परंपरागत मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं , बल्कि उनमें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स , एंटी - ऑक्सिडेंट और फाइबर भीहोते हैं। बस इन्हें भूनने के लिए ज्यादा तेल का इस्तेमाल न किया जाए।
(७)बिना छना आटा खाएं। गेहूं के साथ चने का आटा मिलाने से पाचन अच्छा होता है। गेहूं या जौ का आटा ( बिनाछना ), ब्राउन ब्रेड , दलिया , कॉर्न या वीट फ्लैक्स , ब्राउन राइस व छिलके वाली दालें आदि खाएं। अंकुरित अनाज व दालें विटामिन , मिनरल , प्रोटीन से भरपूर होती हैं।
(८)दो घंटे के बीच में कुछ न खाएं। छुटपुट खाना ही सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन है। बीच - बीच में बिस्कुट ,नमकीन , ड्राई - फ्रूट्स , कोल्ड ड्रिंक , चाय - कॉफी पीते रहना काफी कैलरी जमा कर देता है।
(९)मौसमी फल खाएं। जूस के बजाय साबुत फल बेहतर है। सेब , बेरी लें। सेब में पेक्टिन केमिकल होता है। सेब केसाथ - साथ ज्यादातर सभी फलों के छिलकों में पेक्टिन पाया जाता है। यह फैट को अब्जॉर्ब करता है।
(१०)सोयाबीन में मौजूद लेसिथिन केमिकल सेल्स पर फैट जमा होने से रोकता है। हफ्ते में कम- से -कम तीन बारसोयाबीन खाने से शरीर में फैट से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। सोयाबीन को अंकुरित करके रोज सुबह लिया जासकता है। इसके अलावा लहसुन का रस शरीर में मौजूद फैट्स को कम करने में मददगार है। लहसुन कच्चा खाएं और चबाकर खाएं तो बेहतर है। साथ ही मुट्ठी भर नट्स रोज खाने चाहिए। इनमें बादाम , किशमिश , अखरोट और पिस्ता ले सकते हैं। लेकिन ये फ्राइड न हों और इनमें नमक भी नहीं होना चाहिए।
(११)यदि आप वजन कम करना चाहते हैं तो ज्य़ादातर सफेद चीजें ( आलू , मैदा , चीनी , चावल आदि ) कम करें और मल्टिग्रेन या मल्टिकलर खाने ( दालें , गेहूं , चना , जौ , गाजर , पालक , सेब , पपीता आदि ) पर जोर दें।
(१२)आप सदैव बिना फैट वाला दूध या दही खाएं। दूध में फैट कम करने के लिए उसमें पानी मिलाने से बेहतर है कि मलाई उतार लें। पानी मिलाने से दूध में पोषक तत्व कम होते हैं। सोया से बना पनीर , दूध और दही खा सकते हैं। जिन्हेंदूध या सोया प्रॉडक्ट से एलर्जी है , वे राजमा , नीबू , टमाटर , मेथी , पालक , बादाम , काजू जैसी चीजें खाकरकैल्शियम की कमी पूरी कर सकते हैं।
(१३)आप दिन में 2-3 लीटर पानी व तरल पदार्थ अवश्य लें। पानी न सिर्फ फैट कम करता है , बल्कि शरीर से जहरीले तत्वों को भी निकालता है। यह भूख कम करता है और कब्ज रोकता है। खाने के १५ मिनट बाद घूंट - घूंट कर गर्म पानी पीना चाहिए। आप जब भी पानी पिएं , ठंडे या सादे की बजाय गुनगुने पानी को तरजीह दें।

आपके दिन की शुरुआत निम्नलिखित प्रकार से होना चाहिए |
(१)दिन की शुरुआत कॉफी या चाय से न करें। नीबू पानी , नारियल पानी , जूस लिया जा सकता है।
(२)दिन भर के खाने में सबसे ज्यादा फोकस ब्रेकफास्ट पर होना चाहिए। अक्सर लोग वजन कम करने की धुन में ब्रेकफास्ट नहीं लेते लेकिन रिसर्च कहती हैं कि अगर नियमित रूप से ब्रेकफास्ट लिया जाए तो लंबी अवधि में वजन कम होता है। नाश्ते में हमेशा एक जैसी चीजें न खाएं , बल्कि बदलते रहें।

आपके दिन का अंत निम्नलिखित प्रकार से होना चाहिए :--
आपके दिन का खाना पूरा होना चाहिए , जबकि डिनर सबसे हल्का होना चाहिए। डिनर रात में 8 बजे तक कर लेना चाहिए। ऐसा संभव नहीं है तो भी सोने से दो घंटे पहले खाना जरूर खा लें। राजमा , चावल जैसी चीजें रात में नहीं खाना चाहिए क्योंकि ये आसानी से पचती नहीं हैं। अगर देर रात तक जागते हैं और भूख लगती है तो फ्रूट्स या सलाद खाने चाहिए।

आपके सबसे जरूरी है किसी अच्छे विशेषज्ञ से सलाह करके योजना बनाना और उस पर लगातार अमल करना। आमतौर पर लोग वजन घटाने के लिए डाइटिंग को ही एक तरीका मानते हैं और भूखे रहने लगते हैं , जो सही नहीं है। डाइटिंग कामतलब भूखे रहना नहीं है , बल्कि सही वक्त पर उचित मात्रा में कम कैलरी और लो फैट वाली फाइबर युक्त चीजें खाना है। वास्तव में जब हम कम खाते हैं तो बॉडी का मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है और मिनरल व विटामिन की कमी होजाती है। इसलिए जरूरी है कि आप भरपूर , लेकिन सही खाना खाएं।

हमें वजन घटाने के लिए निम्नलिखित तीन आवश्यक पक्षों पर ध्यान देना ज़रूरी है:--
(१.) कैलरी कम लें। शरीर को कम कैलरी मिलेगी तो वह पहले से जमा कैलरी का इस्तेमाल करेगा।
(२.) ज्यादा कैलरी बर्न करें। एक्सरसाइज और शारीरिक मेहनत करने पर शरीर में जमा फालतू कैलरी बर्न होगी।
(३.) स्ट्रेस कम करें। इससे आपको भूख ज्यादा लगती है और आप इमोशनल ईटिंग करते हैं।

यदि आपने अपना ४ किलो वजन कम करने का लक्ष्य रखा है तो सबसे पहले खाने में से १००० कैलरी की कटौती करें। फिर कैलरी खर्च करें।
दूसरी जरूरी चीज है , आधे घंटे तेज सैर से ८० कैलरी तक बर्न हो जाती हैं। बाकी के लिए एरोबिक्स ,जॉगिंग , स्विमिंग या दूसरी व्यायाम की जा सकती हैं।
तीसरी जरूरी चीज है , लाइफस्टाइल में बदलाव। लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें , नौकर से पानी मांगने के बजाय खुद उठकर जाएं , आसपास रिक्शे या दूसरे वाहन के बजाय पैदल जाएं।
इन छोटी - छोटी चीजों से काफी कैलरी काफी खर्च होती हैं। एक महीने में ३-४ किलो वजन घटाना सही रहता है।

उपर्युक्त सुझावों के अलावा वजन घटाने के कुछ और भी तरीके हैं । इनमें से कुछ घर में अपनाए जा सकते हैं तो कुछ के लिए विशेषज्ञ या आधुनिक व्यायामशाला (जिम) का सहारा लेना होगा ।
'जय हिन्द,जय हिन्दी'

4 टिप्‍पणियां:

  1. यदि तेज दिमाग,पतली कमर चाहिए तो कॉफी पीजिए !

    यदि आप अच्छी याद्दाश्त की चाहत रखते हैं साथ ही कमर का घेरा बढ़ने से चिंतित हैं, तो रोज एक कप कॉफी पीने से आपको इस समस्या से निजात मिल सकती है। समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि कम खाना और खाने के बाद कुछ मीठे पदार्थ का सेवन करने की आदत छोड़ने की बजाय रात्रि भोजन के बाद एक कप कॉफी का सेवन अच्छी स्मरणशक्ति और कमर के बढ़ते मोटापे को रोकने में ज्यादा मददगार हो सकता है। इटली में कम कैलोरी वाले भोजन पर हुए एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि कम भोजन का सेवन स्वास्थ्य को अच्छा बनाता है और इससे आप दीर्घायु होते हैं। वैज्ञानिक इस बात को लम्बे समय से जानते थे लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि स्वास्थ्य सुधार में कितनी कैलोरी कम करना सही होगा।
    इस शोध अध्ययन में स्मरणशक्ति और सीखने की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण सीआरईबी 1 नाम के प्रोटीन पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया गया था। शोधकर्ता जियोवामबाटिस्टा पैनि ने चूहे पर प्रयोग करते वक्त दिखाया कि कैलोरी की मात्रा कम करने से सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने दिखाया कि कैलोरी कम करने से दिमाग में बनने वाले प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ जाती है। इस शोध अध्ययन में यह भी पता चला कि जानवरों में कैलोरी की मात्रा में २५ से ३० प्रतिशत की कमी की जा सकती है लेकिन मानव संदर्भ में यह ६०० कैलोरी प्रति दिन के बराबर है ।
    'जय हिन्द,जय हिन्दी'

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  2. मोटापे की समस्या से निजात पाने के लिये इस आलेख की जितनी प्रशंसा की जाये थौडी है। व्यापक जानकारीपूर्ण लेख के लिये आभार!

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  3. बहुत हि शानदार लेख जिसकी जितनी तारिफ़ कि जाए उतनी कम है, धन्यवाद लेखक महोदय/
    मोटापा कम करने वालों के लिए यह लेख start to end है/

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