गुरुवार, 30 जून 2011

'वर्तमान भ्रष्टाचार, कालेधन और व्यवस्था परिवर्तन पर संघर्ष'



भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार और कालाधन के विरुद्ध चल रहे संघर्ष में बाबा रामदेव के सेना’ तैयार करने के बयान पर अन्ना हजारे ने बाबा को नसीहत देते हुए कहा है कि हर आंदोलन अहिंसात्मक होना चाहिए।  भ्रष्टाचार और कालाधन मामले में अब तक काफी मोर्चों पर एकमत नजर आ रहे बाबा रामदेव और अन्ना हजारे में सेना तैयार करने के बयान पर पूर्ण मतभेद हैं ।
दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के दौरान बाबा रामदेव के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई के बाद हरिद्वार ने अपना अनशन जारी रखते हुए बाबा रामदेव ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके आंदोलन को बाधित करने वाले असामाजिक तत्वों और पुलिस से निपटने के लिए वह 11,000 लोगों की एक सशस्त्र सेना तैयार करेंगे । उन्होंने कहा, "मैं अपील करता हूं कि हर जिले से 20 युवा सामने आएं। हम उन्हें अस्त्र व शस्त्र दोनों का प्रशिक्षण देंगे।11 हजार महिलाओं और पुरुषों की मजबूत सेना तैयार करेंगे ताकि अगली बार दिल्ली के रामलीला मैदान में हम लड़ाई हारकर नहीं लौटे । सेना का गठन केवल आत्मरक्षा के लिए किया जाएगा और वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगी । सेना हमारी और अनुयायियों की रक्षा करेगी। यह किसी की जिंदगी लेने के लिए नहीं होगी ।"

हालांकि बाद में बाबा रामदेव ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है । बाबा रामदेव भ्रष्टाचार, कालेधन और व्यवस्था परिवर्तन पर अपने अनशन से सरकार को झुकाने में असफल रहे और अब उन्होंने फैसला किया है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रास्ते पर चलते हुए देश में ग्रामोद्योग और स्वदेशी की अलख जगाएंगे ।
सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे की रणनीति या बाबा रामदेव की अस्थिर-नीति के सन्दर्भ में विचार करते हुए निम्नलिखित विचार-बिन्दुओं को अवश्य परखना होगा.....
अन्ना और रामदेव की समानताएं :-
१. दोनों ही सज्जन देशहित के लिए आंदोलनरत हैं |
२.दोनों ही व्यक्ति का व्यक्तित्व निष्कलंक है |
३.दोनों ही व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ जन जाग्रति ला रहे हैं |
४.दोनों ही व्यक्ति संविधान की मर्यादा के अन्दर काम कर रहे हैं |
५.दोनों का उद्देश्य भ्रष्टाचार से त्रस्त भारतीयों को सही राह पर ले जाना है |
६.दोनों ही सज्जन लम्बी लड़ाई का संकल्प ले चुके हैं |
७.दोनों ही लोगों की ताकत आम जनता है |
८.दोनों ही सज्जन लुच्चे नेताओं के चक्रव्यूह में घिरे हुए हैं |
९.दोनों के सफल प्रयास के बाद भी जनता आँख मीच कर झूठे नेताओं के दांतों तले दबी बेबस ,लाचार है |
अन्ना हजारे की खासियत :-
१.अन्ना हजारे परिपक्व, अनुभवी व्यक्ति हैं |
२.अन्ना जानते हैं की उन्हें क्या ,कब, कैसे करना है |
३.अन्ना सहज,शांत,निडर एवं साहसी हैं |
४.अन्ना उपदेश नहीं देते ,मगर कार्यरत रहते हैं |
५.अन्ना टीम के लीडर नहीं एक हिस्सा बने रहते हैं |
६.अन्ना की टीम सुशिक्षित ,मीतभाषी और अनुशासित है |
७.अन्ना जनता की ताकत और सरकार के जुल्म करने की ताकत को बहुत करीब से जान पा रहे हैं.
८.अन्ना का आदर्श महात्मा हैं. वे अनुयायी के रूप में प्रस्तुत होते हैं |
९.अन्ना शान्ति से सच्चाई के बम्ब बरसाते हैं उनके विरोधी बेबस हैं |
१०.अन्ना अपरिग्रही ,सच्चे आग्रही हैं |
रामदेव की खासियत :-
१.रामदेव विकसित होता बचपन है |
२.रामदेव यह जानते हैं की क्या करना है मगर कैसे करना है इस बात को अनुभवों से सीख रहे हैं |
३.रामदेव तुरंत परिणाम चाहने वाले, अति आत्मविश्वासी हैं |
४.रामदेव काम जनहित का करते हैं परन्तु खुद का यश भी चाहते हैं |
५.रामदेव स्वयंभू लीडर हैं और टीम भी नयी है |
६.रामदेव घाघ ,चालाक और धूर्त नेता नहीं हैं,सरल सन्यासी हैं |
७.रामदेव जोश से लबालब हैं मगर समय की गति को सही समय पर पकड़ना सीख रहें हैं |
८.रामदेव अभी अपना आदर्श तय कर रहे हैं |
९.रामदेव परशुराम की तरह आतंकियों पर टूट पड़ना चाहते हैं |
१०.रामदेव की ताकत सिर्फ इनके अनुयायी हैं, जो योग सीख रहें हैं |

सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे की रणनीति या रामदेव की अस्थिर-नीति की समानताएं :--
(१) दोनों का लक्ष्य एक ही है -भ्रष्टाचार मुक्त भारत |
(२) दोनों का शिकार एक ही है- देश को खोखला करने वाले नमकहराम नेता |
(३) दोनों का उद्देश्य एक ही है-विकसित और सभी का भारत |
(४) दोनों की रणनीति है रिश्वत खोर नेताओं का अंत लाना |
(५) दोनों के तरीको में फर्क सिर्फ अनुभव का है |
(६) दोनों का कोई निजी हित नहीं है, दुराग्रह तब होता है जब निजी स्वार्थ हो, दोनों ही नेता जनता के लिए लड़ रहें हैं |
(७) दोनों का सपना एक ही है -सच्चे स्वरूप में स्वतंत्रता |
(८) दोनों का आग्रह संविधान को मजबूत करना है |
(९) सरकार की नजर में दोनों सोई हुई जनता को भड़काने वाले आततायी हैं मगर ज्यादातर भारतीयों की नजर में अपने -अपने तरीके से युद्ध में उतरे योद्धा हैं ||
भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे वर्तमान संघर्ष में जुटे समाजसेवी अन्ना हजारे ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बयानों को बेतुका बताते हुए कहा कि उन्हें पुणे के पागलखाने भेज देना चाहिए। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इससे पहले समाजसेवी अन्ना हजारे पर आरोप लगाया था कि अन्ना हजारे संघ के आदमी हैं।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के खिलाफ बयानों की झड़ी लगा दी है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह कभी बाबा रामदेव को ठग बताते हैं तो कभी कहते हैं कि उनका मुख्य धंधा हवाला के जरिए पैसों की हेरा-फेरी करना है। हाल ही में उन्होंने अन्ना हजारे के बारे में कहा कि वह संघ के आदमी हैं। इस आरोप पर अन्ना हजारे ने कहा, ' पुणे के येरवदा में एक पागलखाना है। दिग्विजय सिंह को वहीं बंद कर देना चाहिए।
यह भी एक विचार उभर कर आ रहा है कि ईमानदार प्रधानमन्त्री श्री.मनमोहनसिंह के रहते यदि भ्रष्टाचार का भयावह वातावरण पनपता है तो फिर क्यूँ न कोई अत्यंत-भ्रष्ट व्यक्ति को शासन की बागडोर सौंपी जाये, परिणामस्वरूप शायद राम राज्य वापस आ जाए ?

भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर सरकार के विरुद्ध आन्दोलन की आवश्यकता क्यों पड़ी ? बाबा रामदेव जी व् अन्ना जी को जनसमर्थन क्यों मिला ? जब वर्तमान सरकार के घोटालो की लाइन खुलने लगी ,फिर भी विपक्ष जन रोष व् भावनाओ को पहचान नहीं पाया ! तब गैर राजनैतिक लोगों के राजनैतिक आन्दोलन की चिंगारी को जनता ने हवा देदी ! सबसे पहले बाबा रामदेव जी ने जनता की आवाज को अपना स्वर दिया ! जनता की भीड़ को सरकार भी अनदेखा नहीं कर सकी , तब रामदेव जी के आन्दोलन की हवा निकालने के लिए उनके नए सहयोगी अन्ना जी को ही खड़ा करवा दिया गया | उनकी मांग को “चटपट ” सरकार ने स्वीकार करने का दिखावा किया ! बाद में उनको भी किनारे लगा दिया ! अब सरकार कहती है अब कोई सोसाइटी की बाते नहीं मानी जाएँगी , वह मात्र एक अपवाद था !श्री अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे इस जन-आक्रोश को व्यक्त करने केलिए आगे आए हैं। स्वाभाविक ही सारा जनमानस उनके पीछे है। ऐसे में उस जनमानस की विनयपूर्वक व सहृदयता से दखल लेने की बजाए रामलीला मैदान पर किए गए तानाशाही लहजे में दमनचक्र चलाना शासन की नासमझी और अड़ियलपन को ही व्यक्त करता है।  इस रवैये को छोड़कर शासन आंदोलनकारियों के साथ छल-कपट रहित संवाद बनाकर देश से बाहर गए काले धन को वापस लाने एवं बढ़ते जा रहे भ्रष्टाचार को समाप्त करने और व्यवस्थाओं में उचित परिवर्तन लाने तथा उसके लिए कानून में उचित संशोधन करने पर अधिक ध्यान दें । दरअसल वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार के भवंर में बुरी तरह फंस चुकी है। इस भंवर से निकलने की उसकी हर चाल नुकसानदेह साबित हुई है | आज भी कुछ लोग चिल्ला रहे हैं की अगर हम सुधर गए तो भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा ऐसे लोगो सिर्फ चिल्लाना आता है मेरी इन लोगों से यही प्रार्थना है कि पहले तुम सुधर जाओ और अपने आस पास भी देखते रहो | क्या लोगों को नहीं मालूम हम घूस नहीं देंगे तो कौन लेगा परन्तु ये सिर्फ एक व्यक्ति के बस क़ी बात नहीं है |
आप सभी से अनुरोध है की सच्ची और ईमानदार सरकार बनाये और हमारा धन विदेश से वापस कर दे जिससे हमारा देश और तरक्की करेगा?
!! जय हिंद,जय हिंदी !!

7 टिप्‍पणियां:

  1. *
    सरकार और अन्ना हजारे के बीच जारी रस्साकशी के बीच अन्ना हजारे ने फिर से जंतर-मंतर पर अनशन करने का ऐलान कर दिया है। सरकार इस बात पर अमादा है कि लोकपाल बिल में उसकी ही चले। जनलोकपाल के कड़े प्रावधानों को डाल्यूट कर दिया जाए। अगर काग्रेस के प्रधानमंत्री बेहद ईमानदार हैं तो उन्हें लोकपाल के दायरे में आने में दिक्कत क्या है। अगर जजों से ईमानदारी की अपेक्षा की जाती है तो उनको लोकपाल के दायरे में लाने में सरकार घबरा क्यों रही है। दरअसल, सरकार की मंशा ही उसे फिर से लटका देने की है और उसका ठीकरा वह टीम अन्ना पर ठोंकना चाहती है। इसकी पृष्ठभूमि कुछ दिनों पहले से तैयार हो रही थी। बाबा रामदेव के अनशन पर पुलिसिया कार्रवाई करने के बाद से ही सरकार के हौसले बुलंद हो गए थे। उसके बाद के काग्रेस नेताओं के बयानों को एक साथ जोड़कर देखें तो काग्रेसी रणनीति की तस्वीर साफ तौर पर नजर आती है।रामदेव के अनशन खत्म होने के चंद घटों के भीतर ही काग्रेस के बड़बोले महासचिव दिग्विजय सिंह ने बाबा के अनशन को नाटक करार दिया।
    'जय हिंद,जय हिंदी'

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  2. आज यदि नागरिक समाज को लोकपाल के लिए आंदोलन और अनशन करना पड़ रहा है तो इसके लिए राजनीतिक दल जिम्मेदार हैं, जो संसद की सर्वोच्चता और पवित्रता की थोथी दुहाई दे रहे हैं ।
    'जय हिंद,जय हिंदी'

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  3. *
    प्रिय मित्रों,
    आपके द्वारा शांतचित्त रहने हेतु आपका अत्यंत आभार...........,
    यदि आप सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे तो आपका बलात शमन कर दिया जाएगा। ये परिस्थितियां इसलिए भी निर्मित हो रही हैं क्योंकि निहित स्वार्थ को प्राथमिक मानकर लंबे समय से सत्ता, विपक्ष, नौकरशाही और मीडिया का गठजोड़ हो गया है। यही कारण है कि आज शासकों द्वारा लोकतंत्र को अपने जूते के तले रोंदने में जरा भी हिचक नहीं की जाती है। समय रहते अगर हम नहीं चेते तो देश में हिटलरशाही राज कायम होने में समय नही लगने वाला है । अन्ना हजारे के अनशन से लेकर स्वामी रामदेव के सत्याग्रह के बीच इस बात पर विचार करना जरूरी है कि क्या देश में भ्रष्टाचार का मुद्दा राजनैतिक है, सामाजिक है या फिर धार्मिक ?
    राजनेता समाज से, समाज के लिए और समाज द्वारा समाज की सेवा करने के लिए चुने जाते हैं । समाज का धन अगर सरकार गलत इस्तेमाल करती है तो यह सामाजिक मुद्दा क्यों नहीं बनना चाहिए ? जब सत्ता के लोग ही संदेह के घेरे में हैं तो न्याय कैसे मिलेगा। कृष्ण ने तिकड़म से पांडवों को जीत दिलाई थी। जयप्रकाश नारायण का संपूर्ण क्रांति आंदोलन भी राजनैतिक परिपेक्ष में लड़ा गया था। यानी तिकड़म के खिलाफ सिर्फ तिकड़म से ही लड़ने का रास्ता बचता है । बुराई पर जीतने के लिए गलत रास्ता कैसे मंजिल तक पहुंचा सकता है । सही रस्ता ही सच्चे उद्वेष्य की ओर ले जा सकता है ।
    'जय हिंद,जय हिंदी'

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  4. भारतीय राजनीति में इस समय कुछ ऐसे तथाकथित राजनेता हैं, जिनमें राजनैतिक स्वाभिमान या स्वभाव कभी था ही नहीं जो अब आने कोई सम्भावना बनती दिखाई दे....
    अब देखिये खजाना लुट रहा है तो लुट ही रहा है ...
    अंधेरगर्दी हो रही है तो हो ही रही है .....
    सीबीआई दुरूपयोग हो रहा है तो हो ही रहा है ....
    राज्यों से भेदभाव हो रहा है तो हो ही रहा है ....
    मंत्री और पार्टी नेता कुछ भी कह रहे हैं तो कह ही रहे हैं ...
    मतलब कोई आपका नियंत्रण ही नहीं है ..?
    'जयहिंद,जय हिंदी'

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  5. प्रियमित्रों,
    भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे संघर्ष में शामिल योगगुरु बाबा रामदेव को स्विटरज़रलैंड के लगभग सभी अखबारों जैसे स्विस टुडे, स्विस इलेस्ट्रेटेड, और टीवी चनेलो ने एक "खलनायक " के रूप में बता रहे है . इधर भारत में भी कांग्रेस पार्टी और सरकार उपरी मन से कोई भी दिखावा करे या चाहे जो कुछ भी कहे लेकिन उसे भी अब जनता के जागरूक होने का डर सताने लगा है . कांग्रेस इस देश की टीवी चैनलों और अखबारों को तो खरीद सकती है लेकिन भारत में तेजी से उभर रही न्यू मीडिया [ वेब पोर्टल , फेसबुक , ट्विटर ] पर चाहकर भी वो प्रतिबन्ध नहीं लगा सकती है | एक सर्वेक्षण में पाया गया है की अन्तरजाल(इन्टरनेट) पर वर्तमान भारतीय सरकार के खिलाफ जोरदार अभियान चल रहा है और ये अभियान कोई पार्टी नहीं चला रही है बल्कि इस देश के जागरूक और शिक्षित युवा चला रहे है जिनका किसी भी राजनितिक पार्टी से कोई लेना देना नहीं है |
    'जय हिंद,जय हिंदी'

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  6. परमादरणीय सर,
    आपका कथन अक्षरश: सत्य है, आप ही हमारे प्रणेता हैं !
    आपका आशीर्वाद ऐसे ही मिलता रहे |
    जय हिंद,जय हिंदी

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  7. *
    ‘हम तो अकेले ही चले थे जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया’ मजरूह सुल्तानपुरी का यह शेर अन्ना हजारे के इस जन आंदोलन में सटीक बैठता है |
    'जय हिंद,जय हिंदी'

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