रविवार, 4 सितंबर 2011

'आज का इतिहास,पंचम-भाग'

(सितम्बर माह की १ से १५ सितम्बर तक विभिन्न तिथियों का ऐतिहासिक महत्त्व)


(सितम्बर माह की १ से १५ सितम्बर तक विभिन्न तिथियों का ऐतिहासिक महत्त्व)
'१ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'
१ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २४४वॉ (लीप वर्ष मे २४५वॉ) दिन है। साल मे अभी और १२१ दिन बाकी है ।
१ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---
(१)सन् ११७४- इटली के पीज़ा नगर में विश्व विख्यात पीज़ा टावर की निर्माण आरंभ हुआ। इस टावर को इस लिए बनाया ताकि उसके उपरी भाग में एक बड़ी घड़ी लगाई जा सके। किंतु ५५ मीटर उंचे इस टावर के निर्माण का काम आरंभ होने के कुछ ही समय बाद पांच मीटर की उंचाई पर यह टावर टेढ़ा हो गया इसी कारण इसे टेढ़ा पीज़ा टावर कहते हैं। वभिन्न देशों के इंजीनियरों और विशेषज्ञों के प्रयास से इसे थोड़ा बहुत सीधा किया गया है। 
(२)सन् १८१५- फ़्रांस के ड्राम लेखक ओज़न लाबीश का पेरिस में जन्म हुआ। वे सार्थक कामेडी और ड्रामें लिखने में दक्ष थे। वर्ष १८८८ में उनका निधन हुआ।
(३)सन् १९३९- पोलैंड पर नाजी जर्मनी के आक्रमण के साथ ही दूसरा विश्व युद्ध आरंभ हुआ। प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी के नीचा साबित होने के बाद से इस देश की जनता में राष्टवादी विचारधारा मज़बूत हो गयी थी हिटलर ने इसी का दूरूपयोग करते हुए एक सशस्त्र शक्तिशाली सेना का गठन आरंभ कर दिया।
(४)सन् १९४७- पूर्णो अगितोक संगमा (ग्यारहवीं लोक सभा के सर्वसम्मति से अध्यक्ष ) का जन्म पूर्वोत्तर भारत में मेघालय राज्य के रमणीक पश्चिमी गारो हिल जिले के चपाहटी गांव में हुआ था।
(५)सन् १९६१- योगोस्लाविया की राजधानी बेलग्राड में गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों का पहला सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें २५ देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया यह आंदोलन पूर्वी और पश्चिमी ब्लॉक के मुकाबले में तीसरी दुनिया के सदस्य देशों की सहायता के लिए आरंभ हुआ था। इसमें सदस्यता की सबसे महत्वपूर्ण शर्त पूर्वी और पश्चिमी ब्लॉक से तटस्थ रहना था। किंतु सदस्य देशों के विचारों में भिन्नता के कारण यह आंदोलन अब भी एक मज़बूत मोर्चा बनाने में सफल नहीं हो सका।
(६)सन् १९६९- लीबिया में सेनाधिकारी मोअम्मर कज़्ज़ाफ़ी सैनिक विद्रोह करके सत्ता हथिया ली। इससे पहले इस देश में राजशाही शासन व्यवस्था थी और इदरीस प्रथम वहॉ के नरेश थे। इदरीस जिस समय तुर्की में अपना उपचार करवा रहे थे।
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'२ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'२ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २४५वॉ (लीप वर्ष मे २४६वॉ) दिन है। साल मे अभी और १२० दिन बाकी है ।२ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १५७३- अकबर ने गुजरात फतह किया ।

(२)सन् १६६६- लंदन में भीषण आग की शुरूआत हुई और पांच दिन में पूरा शहर तबाह हो गया ।
(३)सन् १८०१- ब्रिटेन और उसमानी शासन की सेनाओं के निरंतर आक्रमण के बाद फ़्रांस की सेना पराजित हुई और उस मिस्र से निकलना पड़ा।
(४)सन् १८४१- जापान के युवराज हिराबुमि इतो का जन्म ।
(५)सन् १८६५- इंग्लैंड का माओरी युद् समाप्तए हुआ ।
(६)सन् १८७७- जापान में सत्सुामा विद्रोह दबाया गया ।
(७)सन् १९२६- इटली और यमन में हुए समझौते के तहत लाल सागर तट पर इटली का वर्चस्व कायम हुआ ।
(८)सन् १९४५- वियतनाम गणराज्य स्वतंत्र हुआ इस लिए आज के दिन को इस देश का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है। १९वीं शताब्दी के मध्य में वियतनाम फ़्रांस के क़ब्ज़ा में चला गया था। किंतु सन् १९४० में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी से फ़्रांस के पराजित होने के बाद जापान ने फ़्रांस की कमज़ोरी का लाभ उठाते हुए वियतनाम पर अधिकार कर लिया।
(९)सन् १९४५- जापान द्वारा हार स्वीकार कर लिए जाने के बाद दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ। युद्ध के अंतिम दिनों में संयुक्त शक्तियों से बार बार पराजित होने के बाद जापान हथियार डालने पर विवश हुआ। 
(१०)सन् १९४५- हो ची मिन्ही ने स्वतंत्र वियतनाम गणराज्य की स्थापना की।
(११)सन् १९४९- संयुक्तड राष्ट्र आयोग ने कोरिया में गृहयुद्ध भडकने की चेतावती दी ।
(१२)सन् १९६२- सोवियत संघ राजनीतिक दबाब के बाद क्यूबा को हथियार देने पर राजी हुआ ।
(१३)सन् १९७०- कन्याकुमारी में विवेकानन्द स्मारक का उद्घाटन हुआ ।
(१४)सन् १९९०- काला सागर में सोवियत यात्री जहाज के डूबने से 79 यात्री मारे गए व ३१९ अन्य लापता हो गए ।
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'३ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'३ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २४६वॉ (लीप वर्ष मे २४७वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११९ दिन बाकी है ।३ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १९१८- प्रचीन इस्लामी नगर दमिश्क़ पर ब्रिटेन की सेना का अधिकार हो गया। प्रथव विश्व युद्ध के दौरान पश्चिमी शक्तियों का एक मुख्य उददेश्य उसमानी शासन को टुकड़े टुकड़े करना था और अंतत: वे इस प्रयास में सफल रहीं। और उसमानी शासन वाले क्षेत्र एक एक करके ब्रिटेन और फ़्रांस के अधिकार में चले गये यहॉ तक कि आज के दिन दमिश्क़ पर ब्रिटेन का अधिकार हो गया। किंतु पहले कुछ समझौते के आधार पर दमिश्क सहित सीरिया बाद में फ़्रांस के अधिकार में चला गया।
(२)सन् १९४३- द्वितिय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के दौरान जर्मनी के घटक देश डटली ने हथियार डालने के समझौते पर हस्ताक्षर किये। इटली के तानाशाह मसोलीनी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। जिसके बाद संयुक्त सेना ने इटली को जर्मनी से छुड़ाने के लिए व्यापक प्रयास किये। और इसे क्षेत्र से नाज़ी सेना का अधिकार समाप्त कर दिया।
(३)सन् १९७१- कतर ब्रिटेन के अधिकार से स्वतंत्र हुआ। आज का दिन इस देश में राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस देश में राजशाही शासन व्यवस्था प्रचलित है और सह विश्व में गैस के तीसरे बड़े भंडार का स्वामी है। यहॉ की जनसंख्या बहुत कम है।

३ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के जन्मदिन हैं:-
(१)सन् १९२२- सैली टेरी, कनाडाई मेज़ो सोप्रानो (निधन-सन् १९९६)
(२)सन् १९२२- स्टेफ़न Danielsen, फिरोज़ी चित्रकार (निधन-सन् १९७६)
(३)सन् १९७४- राहुल साघवी, एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी
(४)सन् १९७६- विवेक ओवेराय, एक भारतीय अभिनेता
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'४ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'४ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २४७वॉ (लीप वर्ष मे २४८वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११८ दिन बाकी है ।४ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १५१४- फ़्रांस के प्रख्यात शिल्पकार जॉन गोजून का जन्म हुआ। वे फ़्रांस पुनर्जागराण आंदोलन के अग्रिणी लोगों में से थे उन्होंने कई गिरजाघरों का निर्माण किया। गोजून ने पेरिस के लोवेर संग्रहालय के निर्माण में भी योगदान दिया। सन् १५६७ ईसवी में उनका निधन हुआ। 

(२)सन् १७९७ - फ़्रांस की सेना ने राजशाही शासन व्यवस्था के समर्थकों के विरुद्ध विद्रोह करके उनका दमन किया। फ़्रांस की क्रान्ति के आठ साल बाद सरकार और क्रान्ति के नेताओं के अनुचित क्रियाकलापों तथा योरोपीय देशों के साथ युद्ध में कई मोर्चों पर फ्रांस की सेना की पराजय के बाद होने वाले चुनावों में लागों ने राजशाही शासन व्यवस्था के पक्ष में वोट डाले। किंतु क्रान्तिकारी नेताओं के कहने पर सैनिक अधिकारियों ने विद्रोह कर दिया विद्रोहियों में नेपोलियन बोनापार्ट भी शामिल था। नेपोलियन बोनापार्ट के लिए सत्ता हथियाने का अवसर उपलब्ध हुआ।
(३)सन् १८२८- फ़्रांस के लेखक और इतिहासकार हीपोलीटन का जन्म हुआ। इतिहसकार के रुप में विख्यात होने से पूर्व उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में परिश्रम किया था। सन् १८९३ ईसवी में उनका निधन हो गया।
(४)सन् १८८२- अमरीकी अविष्कारक एडीसन ने बिजली का पहला मोटर बनाया। यह तीन सौ हार्स पावर का था। एडिसन ने इस मोटर के सहारे न्यूयार्क नगर में एक कारख़ाना स्थापित किया जो नगर के आधे भाग की विद्युत आपूर्ति करता था। एडिसन ने सन् १८६९ में बल्ब का भी अविष्कार किया।
(५)सन् १९२३- लेकहर्स्ट (न्यू जर्सी)में,, पहले अमेरिकी हवाई पोत, यूएसएस शेनंडो ने पहली बार आसमान में उड़ान भरी ।
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'५ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'५ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २४८वॉ (लीप वर्ष मे २४९वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११७ दिन बाकी है ।५ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १८८७- चीन में हवांग हू नदी का तूफ़ान आरंभ हुआ। इस तूफ़ान से भारी बाढ़ आयी जो एक महीने तक जारी रहीं इस विनाशकारी बाढ़ ने लगभग ९ लाख लोगों की जान ले ली। कई शहर और सैकड़ों गांव बह गये। तथा कृषि नष्ट हो गयी। इस नदी की लम्बाई ५ हज़ार दो सौ किलोमिटर है। यह पूर्वी चीन में बहती है।

(२)सन् १८८८- डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (सन् १९५२ - सन् १९६२) और द्वितीय राष्ट्रपति रहे। उनका जन्म दक्षिण भारत के तिरुत्तनि स्थान मे हुआ था जो चेन्नई से ६४ किमी उत्तर-पूर्व मे है। उनका जन्मदिन (५ सितम्बर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है । (निधन– १७ अप्रैल, सन् १९७५)
(३)सन् १९९३ ईसवी को पराकाश में इस्लामी जगत की एक भव्य मस्जिद का उदघाटन हुआ। यह आधुनिक और प्राचीन निर्माण शैली के मिश्रण का नमूना है। इसमें कुल मिलाकर एक साथ १ लाख लोग नमाज़ पढ़ सकते हैं। बड़ी ही सुंदर चूनाकारी से नमाज़ ख़ाने को सजाया गया है। इसी प्रकार मस्जिद से मिलाकर एक धार्मिक स्कूल और पुस्तकालय बनाया गया है।
(४)सन् १९३९ ईसवी को अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ़्रेकलिन रोज़वेल्ट ने योरोप में आरंभ हो वाले द्वितीय विश्व युद्ध में अमरीका की निष्पक्षता की घोषणा की।
(५)सन् १९९७ ईसवी को मदर टेरेसा का भारत के कोलकाता नगर में निधन हुआ। उनका मौत का कारण हृदय की गति का रुक जाना था। उन्होंने अपना पूरा जीवन दीन दुखिया की सेवा में अर्पित कर दिया था ।
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'६ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'६ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २४९वॉ (लीप वर्ष मे २५०वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११६ दिन बाकी है ।६ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् ४८ ईसा पूर्व- रोम साम्राज्य त्रिकोणीय गठजोड़ के दो महत्वपूर्ण सदस्यों जूल सिज़र और पोम्पस के बीच फ़ारसाल नामक ऐतिहासिक युद्ध इस युद्ध में सिज़र को विजय हुई और पोम्पस मारा गया। इस सफलता के बाद सिज़र रोम के सम्राट बन गये १०१ वर्ष पूर्व सिज़र का जन्म हुआ वे युवावस्था में सेना में भर्ती हो गये और धीरे धीरे रोम की सेना के प्रभावशाली कमांडर बन गये। पोम्पस को पराजित करने के बावजूद सिज़र रोम में एक अत्याचारी शासन की स्थापना के अपने प्रयास के दौरान एक राजनैतिक षडयंत्र का शिकार हुए उन्हें रोम की सेनेट के प्रांगड़ में मार दिया गया। 
(२)सन् १९२३- एक इतालवी अधिकारी की हत्या के बदले की कार्यवाही में इतालवी नौसेना ने केर्किरा पर अधिकार कर लिया। राष्ट्रसंघ के विरोध करने पर वह २९ सितंबर को उससे अलग हो गया।
(३)सन् १९६५- भारत और पाकिस्तान की संयुक्त सीमा पर एक महीने से अधिक समय तक अशांति के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर व्यापक आक्रमण आरंभ किया। दोनों पड़ोसी देशों के बीच कश्मीर मामले को लेकर यह दूसरी लड़ाई थी यह युद्ध लगभग तीन सप्ताह तक चलता रहा और अंतत: सोवियत संघ की मध्यस्थता से थमा। और दोनों ने १० जनवरी,सन् 1966 से ताजेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधान मंत्री की मध्यस्थता से वार्ता आरंभ की। वार्ता के समापन पर एक संयुक्त घोषण पत्र जारी हुआ जिसमें कश्मीर समस्या के समाधान और भारत पाक संबंधों के बेहतर बनाने के मार्गों का उल्लेख किया गया था। हालॉकि विश्व के अनेक देशों ने इस घोषणा पत्र का स्वागत किया किंतु यह कश्मीर समस्या का समाधान न कर सका। इस समस्या को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी तनाव जारी है।
(४))सन् १९६८- दक्षिणी अफ़्रीक़ा में स्वाज़ीलैंड नामक देश ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ। और आज के दिन को इस देश राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया।

६ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के जन्मदिन हैं:-
(१)सन् १९२९-यश जौहर, फिल्म निर्माता
(२)सन् १९७१- देवांग गांधी, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी

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'७ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'७ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५०वॉ (लीप वर्ष मे २५१वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११५ दिन बाकी है ।७ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---


(१)सन् १६८३- फ़्रांस के गणितज्ञ और वैज्ञानिक रिओमोर का जन्म हुआ। उन्होंने २० वर्ष की उम्र में गणित के संबंध में एक पुस्तक प्रकाशित की और २५ वर्ष की आयु में विज्ञान अकादमी में प्रवेश लिया। वे फारेनहाइट के समय में शोधकार्य में लीन थे और तापमान मापक यंत्र बनाने के लिए प्रयासरत थे। सन् १७३० में वे अंतत: अपने इस प्रयास में सफल हुए। सन् १७५७ में रिओमोर का निधन हुआ। 

(२)सन् १८१२- बोरोडिनो के युद्ध में नेपोलियन ने रूसी सेना को पराजित किया।
(३)सन् १८२२- ब्राज़ील ने पुर्तगाल के अधिकार से स्वतंत्रता प्राप्त की। आज का दिन ब्राज़ील का राष्ट्रीय दिवस है। पुर्तगाल ने सन् १४९४ ईसवी से ब्राज़ील पर क़बज़ा आरंभ किया।पुर्तग़ाल ने स्थानीय रेडइंडियन्स और अफ़्रीक़ा से लाखों अश्वेतों को ब्राज़ील में खेती में लगाया १९वीं शताब्दी के आरंभ में जब पुर्तगाल पर नेपोलियन बोनापार्ट का अधिकार हुआ तो पुर्तगाली तानाशाह अपने परिवार के साथ ब्राज़ील भाग गये जो पुर्तगाल का उपनिवेश था। बोनापोर्ट की पराजय के बाद पुर्तगाली तानाशाह अपने देश लौट गये। किंतु उनके पुत्र ब्राज़ील में उनके उत्तराधिकारी के रुप में बने रहे। उन्होंने १४ वर्ष के बाद आज के दन पुर्तगाल से ब्राज़ील की स्वाधीनका की घोषणा की और स्वयं को ब्राज़ील का नरेश घोषित किया, सन् १८८९ में ब्राज़ील में लोगतंत्र की स्थापना हुई।
(४)सन् १८६०- लेडी एलगीन नामक जहाज के लेक मिसीगन में डूब जाने से ४०० से अधिक लोगों की मौत हो गई।
(५)सन् १८९९ - चीन में मुक्कोबाजों का एक ऐतिहासिक आंदोलन आरंभ हुआ। यह मुक्केबाज़ चीन की सेना का भाग थे। इन्हें आई हू च्वान या न्यायपूर्ण समनिवत मुक्के कहा जाता था। इन लोगों ने चीन के आंतरिक मामलों में जापान और पश्चिमी देशों के प्रतिदिन बढ़ते हस्तक्षेप के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया और राजधानी पेइचिंग में पश्चिमी देशों के दूतावासों पर क़ब्ज़ा कर लिया। वे चीन में योरोपीय प्रचारकों के पीछे पड़ गये।
(६)सन् १९०१- पीकींग विदेशियों के नियंत्रण में। 8 देशों की संयुक्त सेना ने चीन के राजा को बॉक्सर की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। बॉक्सर विद्रोह का अंत हुआ।
(७)सन् १९२१- अमेरिका के न्यू जर्सी में पहली मिस अमरिका सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।
(८)सन् १९२७- फिलियो टेलर ने पूर्णतः इलेक्ट्राणिक टीवी बनाने में सफलता हासिल की।
(९)सन् १९२९- फिनलैंड में नाजीजार्वी लेक में कुरो नाम स्टीमर के डूबने से 136 लोगों की मौत
(१०)सन् १९४०- द्वितीय विश्वयुत्ध में जर्मन सेना ने ब्रिटेन से लड़ाइ की अपनी रणनीति परिवर्तित की और लंदन सहित ब्रिटेन के विभिन्न शहरों पर बमबारी आरंभ कर दी।
(११)सन् १९५३ - निखिता खुर्स्चियो सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की सचीव चुनी गईं।
(१२)सन् १९७९- स्कॉट रसमिसल और उनके पिता ब्यू रस्मिसन द्वारा स्थापित खेल और मनोरंजन केबल चैनल इ.एस.पी.एन. ने केबल कार्यक्रमों की शुरुआत की।
(१३)सन् १९८६- विशप डेस्मंड टूटू नोबेल पुरस्कार जीतने के पश्चात 2 वर्ष के लिए केपटाउन के पहले काले आर्च विशप बने ।
(१४)सन् १९९७- बेस्ट मिंस्टर आइवी तक राजकुमारी डायना की 4 मील लंबी शवयात्रा निकली जिसका सीधा प्रसारण लाखों लोगों ने टीवी पर देखा ।
(१५)सन् २००९- भारत के पंकज आडवाणी ने विश्व पेशेवर बिलियर्ड्स चैम्पियनशिप जीती ।

७ सितम्बर 
को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के जन्मदिन हैं:-
(१)सन् १९२२- डेविड क्रॉफ्ट]], ब्रिटिश लेखक, निर्माता और अभिनेता
(२)सन् १९४८ - ममूटी - मलयालम फ़िल्म अभिनेता
(३)सन् १९८४ - वीरा ज़्वोनारेवा, रूस की टेनिस खिलाड़िन

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'८ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'८ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५१वॉ (लीप वर्ष मे २५२वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११४ दिन बाकी है ।८ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १७६३- वर्षों के संघर्ष के बाद अंतत: कैनेडा पेरिस समझौते के आधार पर फ़्रांस के अधिकार से स्वतंत्र हुआ। और औपचारिक रुप से इसे ब्रिटेन का समर्थन प्राप्त हुआ। किंतु फेंनच मूल के केनेडाइयों और कैनेडा में रहे ब्रिटेन वासियों के बीच लम्बे समय तक विवाद जारी रहा। वर्ष 1867 ईसवी को कैनेडा की स्वाधीनता के बावजूद यह देश राजनैतिक व्यवस्था की दृष्टि से ब्रिटेन का अनुयायी है।

(२)सन् १९४१-नाजी जर्मनी के सैनिकों ने सोवियत संघ पर आक्रमण के तीन महीने बाद लेनिन्ग्राड का परिवेष्टन कर लिया। किंतु हिटलर और उसके सेनाकमांडरों के अनुमान के विपरीत इस नगर पर नाज़ी सेना का अधिकार न हो सका बल्कि जनवरी सन् १९४४ तक इस नगर की जनता ने संघर्ष किया और यह परिवेष्टन तोड़ दिया।
(३)सन् १९४८- जर्मनी के संगीतकार रिचर्ड एश्ट्रोविस का निधन हुआ। उनका जन्म से सन् १८६४ में हुआ। उन्हें १९वीं और २०वीं शमाब्दी में आधुनिक रोमैन्टिक संगीत का जनक समझा जाता है ।
(४)सन् १९५४- फ़िलीपीन की राजधानी मनीला में दक्षिण पूर्वी एशिया के संयुक्त सुरक्षा समझौते सीटो पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, पाकिस्तान, थाइलैंड, न्यूज़ीलैंड और फ़िलीपीन के बीच हुआ। वियतनाम युद्ध में अमरीका की पराजय के बाद सन् १९७५ में यह समझौता निरस्त हो गया ।


८ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द दिवस हैं:-
(१)विश्व साक्षरता दिवस
(२)मैसिडोनिया गणराज्य का स्वतंत्रता दिवस
(३)माल्टा में विजय दिवस

८ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के जन्मदिन हैं:-
(१)
सन् १५०४- इटली के फ्लोरेंस में माइकल एंजेलो ने अपनी प्रसिद्ध मूर्ति डेविड का लोकार्पणकिया।
(२)सन् १५१४- ओरसा का युद्ध, लिथुआनिया और पोल सेना ने रूसी सेना को ओरसा (वर्तमान समय में बेलारुस) में पराजित किया।
(३)सन् १९२२- सिड सिज़र, अमेरिकी हास्य अभिनेता (योर शो ऑफ शोज़)
(४)सन् १९२३- होंडा प्वाइंट आपदा। सात अमेरिकी नौसेना विध्वंसक कैलिफोर्निया तट से टकरा गया।
(५)सन् १९२६- भूपेन हजारिका, कलाकार
(६)सन् १९४३- आशा भोंसले, प्रसिद्ध पार्श्व गायिका
(७)सन् २००६- महाराष्ट्र के नासिक जिले में मालेगाँव बम धमाके।

८ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों का निधन हुआ:-

सन् १९६०- फिरोज गाँधी, राजनेता तथा पत्रकार,
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'९ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'९ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५२वॉ (लीप वर्ष मे २५३वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११३ दिन बाकी है ।९ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १७७६- फिलाडेल्फिया में दूसरे महाद्वीपीय बैठक में संयुक्त उपनिवेश (युनाइटेड कॉलोनी) का नाम संयुक्त राज्य (युनाइटेड स्टेट) रखा गया।

(२)सन् १९१५- प्रसिद्ध भारतीय क्रांतिकारी जतिन्द्रनाथ सान्याल और अंग्रेजों के बीच उड़ीसा के काप्टेवाड़ा में संघर्ष।
(३)सन् १९२०- अलीगढ़ का एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में रूपांतरित हो गया।
(४)सन् १९२२- तुर्की की सेनाओं ने ग्रीक सेना का पीछा करते हुए इज़मिर में प्रवेश किया।
(५)सन् १९२४-कोवाइ हवाई में हनेपेप नरसंहार हुआ।
(६)सन् १९२४-बेल्जियम में ८ घंटा कार्य दिवस लागु हुआ।
(७)सन् १९२४- ९ सितंबर से ११ सितंबर तक भारत में कोहाट दंगे हुए।
(८)सन् १९२३- तुर्की प्रमुख अतातुर्क ने सीएचपी की स्थापना की।
(९)सन् १९४५- प्रथम कंप्युटर बग की खोज।
(१०)सन् १९४८-  जापानी सैनिकों के हथियार डालने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए इन सैनिकों ने चीन पर अतिग्रहण कर लिया था। जापान के तत्कालीन नरेश हीरुहीतू के आदेश पर 10 लाख जापानी सैनिकों नक हथियार डाले और चीन तथा जापान का ऐतिहासिक युद्ध समाप्त हुआ। चीन की यह सफलता सशस्त्र कम्यूनिस्ट सैनिकों और चीन की सरकारी सेना के बीच एकता का परिणाम थी। किंतु जापान को पराजित करने के बाद चीन में दोनों पक्षों के बीच आंतरिक युद्ध आरंभ हो गया जिसमें कम्युनिस्ट सैनिकों को जीत हुई और चीन में कम्युनिष्ट शासन व्यवस्था स्थापित हुई। 
(११)सन् १९४८- द्वितीय विश्व युद्ध और कोरिया प्रायद्वीप के विभाजन के बाद उत्तरी कोरिया ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। कोरिया का इतिहास विदेशी आक्रमणों से भरा पड़ा है।सन् १९०५ में जापान ने चीन और रुस को पराजित करके कोरिया पर क़ब्ज़ा किया और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्त तक इसे अपने नियंत्रण में रखा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और कोरिया के स्वतंत्रता संग्रामियों ने जापान से संघर्ष किया। किंतु इस क्षेत्र की स्वतंत्रता के बजाए सन् १९४५ में उत्तरी कोरिया पर रुस और दक्षिणी कोरिया पर अमरीका का अधिकार हो गया बाद में दक्षिणी कोरिया ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की जिसके एक महीना बाद आज के दिन उत्तरी कोरिया ने भी अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। अब इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण मामला दोनो कोरियाओं का एक देश में परिवर्तित होना है जिसके लिए भी वार्ताएं जारी हैं।
(१२)सन् १९४८- कोरिया गणराज्य की स्थापना।
(१३)सन् १९४९- भारत की संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया।
(१४)सन् १९७६- चीन के विश्व विख्यात नेता माओ त्से तोंग का निधन हुआ। उनका जन्म सन १८९३ ईसवी को हुआ था। सन् १९२१ में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर कम्युनिष्ट पार्टी की आधार शिला रखी। माओ, कम्युनिस्ट आंदोलन से द्वारा कृष्कों के समर्थन पर बल देते थे। इसी कारण ग्रमीण क्षेत्रो में उनक बहुत से समर्थक पैदा हो गये। सन् १९३४ में एक लाख कम्युनिस्ट सैनिकों ने माओ के नेतृत्व में चीन के उत्तर से दक्षिण तक मार्च किया। इसमे एक वर्ष का समय लगा। माओ के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने सन् १९४९ में सरकार बनायी जो चीन की एक शक्तिशाली सरकार में परिवर्तित हो गयी। कम्युनिज़्म के बार में माओ का विचार मार्क्स तथा लेनिन विचारधाराओं से कुछ अलग है इसे माओइज़्म कहा जाता है।
(१५)सन् १९९१- ताजिकेस्तान से सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। रुस के ज़ार शासकों ने १९वीं शताब्दी से इस देश पर अपना नियंत्रण जमाया। किंतु सन् १९८० के दशक मे सोवियत संघ में होने वाले राजनैतिक परिवार्तनों के बाद ताजेकिस्तान ने भी अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।

९ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के जन्मदिन हैं:-

(१)सन् १८५०- भारतेन्दु हरिश्चंद्र, आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रवर्तक, जिन्होंने हरिश्चंद्र मैगजीन,कविवचन सुधा जैसी पत्रिका निकाली तथा अंधेरनगरी और भारत दुर्दशा आदि अनेक नाटक लिखा। 
(२)सन् १९२२- हंस जिओर्ग डेह्मेल्ट, [नोबेल पुरस्कार विजेता, जर्मन भौतिकविद
(३)सन् १९६७- अक्षय कुमार, हिन्दी-फिल्म के लोकप्रिय अभिनेता जिन्होंने मोहरा, धड़कन, हेराफेरी, सिंग इज किंग जैसी हिन्दी-फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई ।
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'१० सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'१० सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५३वॉ (लीप वर्ष मे २५४वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११२ दिन बाकी है ।१० सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १८८७-पं0 गोविन्द बल्लभ पन्त का अल्मोड़ा में जन्म हुआ (7 मार्च, 1961 को नई दिल्ली में निधन हुआ)
(२)सन् १९१४- माज़ोरी नामक नदी के समीप जर्मनी और रुस की सेनाओं के बीच युद्ध आरंभ हुआ। यह युद्ध प्रथम विश्व युद्ध में संयुक्त मोर्चे में रुस की सम्मिलित के बाद आरंभ हुआ। माज़ईरी युद्ध में हेडनबर्ग के नेतृत्व में जर्मन सेना ने विजय प्राप्त की। और लगभग २० हज़ार रुसी सैनिक मारे गये और ४५ हज़ार को बंदी बना लिया गय। अंतत: सन् १९१७ में रुस में क्रान्ति आने के बाद यह देश प्रथम विश्व युद्ध से बाहर निकल गया।
(३)सन् १९१९- प्रथम विश्व युद्ध के विजयी देशों और ऑस्ट्रिया हंग्री शासन के बीच सेंन्ट जर्मन समझौते पर हस्ताक्षए हुए। इस समझौते के आधार पर ऑस्ट्रिया को ऑस्ट्रिया हंग्री और चेकोसलावाकिया में विभाजित कर दिया गया। इसी प्रकार उसका कछु भाग इटली,योगोस्लाविया, सोवियत संघ पोलैन्ड और रोमानिया के दे दिया गया। दूसरी ओर युद्ध के आरंभ में ऑस्ट्रिया की संसद ने इस देश द्वारा जर्मनी का साथ दिए जाने पर सहमति जताई थी किंतु सेंट जर्मन समझौते के आधार पर जर्मनी ऑस्ट्रिया की एकजुटता समाप्त हो गयी।
(४)सन् १९५४- अलजीरिया के दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र ओरालियान वील में भीषण भूकम्प आया। जिसके कारण दस हज़ार व्यक्ति मारे गये और हजारों लोग बेघर हो गये।
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'११ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'११ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५४वॉ (लीप वर्ष मे २५५वॉ) दिन है। साल मे अभी और १११ दिन बाकी है ।११ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १९४८- पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जेनाह का निधन हुआ। उनका जन्म सन् १८७६ ईसवी में कराची नगर में हुआ था।

(२)सन् १९७३- चिली के तत्कालीन नौसेना कमांडर जनरल आगोस्टो पीनूशे ने अमरीका के समर्थन में सिल्वाडोर आलेन्डे का तख्ता उलट दिया। आलेन्डे सन् १९७० ईसवी को चिली के राष्ट्रपति बने और इस देश के बैंको खदानों और उद्योगों को राष्ट्रीयकरण आरंभ कर दिया।
(३)सन् २००१- अमरीका में चार अपचालित विमानों में से दो न्यूयार्क में विश्व व्यापार केंद्र की गगनचुंबी जुड़वों इमारतों से और एक विमान रक्षा मंत्रालय पेंटागोन की इमारत से टकाराया। जबकि चौथे विमान को आसमान में तबाह कर दिया गया। इस बड़े आतंकवादी आक्रमण में वर्ल्ड ट्रेड सेंन्टर की जुड़वा इमारतें पूरी तरह ढह गयीं। जबकि पेंटागोन के कुछ भाग को क्षति पहुंची। कुल मिलाकर ३ हज़ार २०० लोग मारे गये। अमरीका ने इस आक्रमण के लिए आतंकवादी गुट अलकायदा को आरोपी बताया और बिन लादेन की गिरफ़तार तथा अलकायदा की तबाही के बहाने एक महीने के अंदर अफ़गानिस्तान पर आक्रमण किया।
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'१२ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'१२ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५५वॉ (लीप वर्ष मे २५६वॉ) दिन है। साल मे अभी और ११० दिन बाकी है ।१२ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १६८३- उस्मानी सेना के योरोप की ओर अग्रसर होने के कारण ऑस्ट्रिया तथा पेलैंड की संयुक्त सेना और उस्मानी सेना के मध्य एक रक्त रंजित युद्ध आरंभ हुआ। इस युद्ध में उस्मानी सेना ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना का लगभग दो महीनें तक परिवेष्टन जारी रखा। और यदि इस नगर पर उसका अधिकार हो जाता तो उसमानी शासन को योरोप महाद्वीप में अपनी सीमाएं विस्तृत करने के मार्ग में एक बड़ी सफलता प्राप्त होती। किंतु ऑस्ट्रिया और पोलैंड की सेना ने कड़ा प्रतिरोध किया और उसमानी सेना को पीछे हटना पड़ा। 
(२)सन् १८९७- विश्व विख्यात फ़्रांसीसी भौतिक एवं रासनशास्त्री एरेन क्यूरी का पेरिस में जन्म हुआ। उनकी मॉ प्रख्यात अविष्कारक मादाम क्यूरी और पिता पेयर क्यूरी थे। जिन्होंने कई रेडियो ऐक्टिव तत्वों की खोज की। एरेन क्यूरी ने अपनी मॉ के सहकारियों के साथ मिलकर शोधकार्य किया और भैतिक शास्त्र के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां अर्जिक कीं। उन्हें भारी सफलताओ के कारण नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
(३)सन् १९४४- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लंदन में अमरीका, रुस, तथा इंगलैंड के प्रतिनिधियों द्वारा जर्मनी पर अधिकार के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। तथा संयुक्त सेनाओं ने अपने निरंतर आक्रमण से सन् १९४५ में जर्मनी पर पूर्ण अधिकार स्थापित किया। सन् १९४९ में जर्मनी दो अलग देशों पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी में विभाजित गया।
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'१३ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'१३ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५६वॉ (लीप वर्ष मे २५७वॉ) दिन है। साल मे अभी और १०९ दिन बाकी है ।१३ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १२५०- ईसाइयों और मुसलमानों के बीच मन्सूरिया नामक युद्ध आरंभ हुआ। यह युद्ध जिसे क्रूसेड के नाम से भी जाना जाता है, मिस्र में हुआ। फ्रेंस सम्राट सेन लुई ने मिस्र पर अधिकार जमाने के प्रयास में थे किंतु विख्यात मुस्लिम कमांडर सलाहुद्दीन अययूबी के नेतृत्व में मुसलमान सेना ने ईसाई सेना को पराजित किया और सेना लुई गिरफ़तार कर लिए गये।
(२)सन् १६५८- इंगलैंड के पहले राष्ट्रपति ओलिवर क्रेमविल का ५९ वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने इंगलैंड के नरेश चार्ल्स प्रथम को मृत्युदंड दिए जाने के बाद इस देश में राजशाही शासन व्यवस्था का समाप्त करके सन् १६४९ से अनौपचारिक रुप से और सन् १६५३ से औपचारिक रुप ब्रिटेन के शासक बने। और कुल मिलाकर नौ वर्ष तक अत्याचार के साथ शासन किया। क्रेमवेल के बाद उनके पुत्र ने उनका स्थान संभाला किंतु उनकी आयोग्यता के कारण उन्हें अपदस्थ कर दिया गया और इंगलैंड में दोबारा राजशाही शासन व्यवस्था आरंभ हो गयी।
(३)सन् १७८०- अमरीका के शिकागो गर में लिफ्रट का पहला परीक्षण किया गया। इसे जॉन बेकबार्ट नामक एक अमरीकी ने बनाया था। इस परीक्षण में कुछ लोगों को १०० मीटर की उँचाई तक ले जाकर फिर नीचे लाया गया। बिजली की पहली लिफ्रट सन् १८८९ में और पहली ऑटोमेटिक लिफ्रट सन् १९१५ में बनी।
(४)सन् १९२२- पोलिश संसद द्वारा जिडायनिया बंदरगाह निर्माण अधिनियम पारित कर दिया गया।
(५)सन् १९२२- लीबिया के एल अज़िज़िया में धरती पर तब तक का उच्चतम तापमान दर्ज किया गया। छाया में मापा गया यह तापमान १३६.४ डिग्री एफ (५८ डिग्री सेंटीग्रेड) था।
(६)सन् १९२२- स्मरना अग्नीकांड हुआ,जिसमें संभवतः तुर्की सेना द्वारा १३-१५ सितंबर तक लगाए गए इस आग में स्मरना के अधिकांश हिस्से नष्ट हो गए थे। एक अनुमान के अनुसार इसमें एक लाख लोग मारे गए थे।
(७)सन् १९२३- स्पेन में सैन्य तख्तापलट। मिगेल डे प्रिमो रिवेरा ने सत्ता संभाली और एक तानाशाही सरकार की स्थापना की। ट्रेड यूनियनों को दस साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।
(८)सन् १९४७- भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने 40 लाख हिंदूओं और मुसलमानों के पारस्परिक स्थानांतरण का सुझाव दिया।
(९)सन् २००८- दिल्ली में तीन स्थानों पर ३० मिनट के अंतराल पर एक के बाद एक चार बम विस्फोट हुए। इनमें १९ लोगों के मृत्यु और ९० से अधिक घायल हुए |
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'१४ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'१४ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५७वॉ (लीप वर्ष मे २५८वॉ) दिन है। साल मे अभी और १०८ दिन बाकी है ।१४ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १७७०- डेनमार्क में प्रेस की स्वतंत्रता को मान्यता मिली।
(२)सन् १८०४- पहली बार बैलून का प्रयोग विभिन्न हवाओं को पहचान्ने के लिए किया गया। हवा में पायी जाने वाली हल्की गैसों से भरे हुए इस गब्बरे को फ़्रांस के भौतिक व रसायन शास्त्री जोज़फ़ लोसाक ने बनाया था। उनके इस बैलून ने ४६० मीटर की उँचाई तक उड़ान भरी।
(३)सन् १८१२- रुस की राजधानी मॉस्को में जान बूझकर आग लगाए जाने की सबसे भयानक घटना हुई नेपोलियन बोनापार्ट के सैनिकों द्वारा मॉस्को पर अधिकार कर लिए जाने के बाद इस नगर के शासक ने पूरे नगर को आग लगा देने का आदेश दिया। ताकि फ़्रांस की सेना को इस नगर में रहने के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री तथा अन्य साधन ने मिल सके। इस घटन में मॉस्को नगर का तीन चौथाई भाग पूर्ण रुप से जल गया।
(४)सन् १८१४- फ्रैंसिस कॉटकी द्वारा अमेरिका के राष्ट्रगान स्टार स्पैंगिल्ड बैनर लिखा गया।
(५)सन् १९०१- अमेरिकी राष्ट्रपति विलियम मैकेंजी की अमेरीका में गोली मारकर हत्या।
(६)सन् १९११- पीटर स्टॉलिपिन रूसी क्रांतिकारी शहीद हुए।
(७)सन् १९४९ को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी । इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् १९५३ से संपूर्ण भारत में १४ सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।
स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग १७ के अध्याय की धारा ३४३(१) में इस प्रकार वर्णित है:
'संघ की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी । संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा ।'
(८)सन् १९५९- लूना- २ चंद्रमा की सतह पर उतरा। यह चंद्रमा की सतह तक पहुँचने वाली मानव निर्मित पहली वस्तु थी। इसने सोवियत संघ और अमेरिका में अंतरिक्ष स्पर्धा की शुरुआत की।
(९)सन् १९६०- खनिज तेल उत्पादक देशों ने मिलकर ओपेक की स्थापना की।
(१०)सन् १९८२- मोनैको की राजकुमारी ग्रेस, जो कार दुर्घटना में घायल हो गई थीं और कुछ दिनों के बाद ही उनकी मौत हो गयी ।
(११)सन् १९९८- माइक्रोसॉफ्ट, जनरल इलेक्ट्रिक को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनी। न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज में उसकी कीमत २६१ अरब डॉलर आँकी गइ।
(१२)सन् २००१- ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के लिए अमेरिका में ४० अरब डॉलर मंजूर किया गया।
(१३)सन् २००३- युरोपिए संघ में शामिल होने के लिए एस्टोनिया में जनमत संग्रह। इसके बाद एस्टोनिया यूरोपीय संघ में शामिल हो गया।

१४ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के जन्मदिन हैं:-

 (१)सन् १७६५- जर्मनी के समाजशास्त्री और शिक्षावादि ग्यूम दो होबोल्ड का जन्म हुआ। (सन् १८३५ ईसवी को ७० वर्ष की आयु में निधन हो गया।}
(२)सन् १९१४- गोपालदास परमानंद सिप्पी जिन्हें जीपी-सिपी के नाम से भी जाना जाता है, इन्होंने ब्रह्मचारी, अंदाज, सीता और गीता, शोले, पत्थर के फूल आदि फिल्में निर्देशित की।
(३)सन् १९३०- राजकुमार कोहली, नागिन (सन् १९७६), जानी दुश्मन, राजतिलक, विरोधी आदि के निर्माता
(४)सन् १९३२- दुर्गा भाभी, प्रसिद्ध भारतीय स्वाधीनता सेनानी और क्रांतिकारी
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'१५ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व'१५ सितम्बर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २५८वॉ (लीप वर्ष मे २५९वॉ) दिन है। साल मे अभी और १०७ दिन बाकी है ।१५ सितम्बर का ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित करने वाली कुछ प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं---

(१)सन् १८२१- निकारागुआ हुंडुरास एलसेल्वाडोर ग्वाटेमाला और कॉस्टारिका जैसे देशों ने स्पेन से अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। नेपोलियन बोनापार्ट द्वारा स्पेन पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद इस देश की सरकार व सेना कमज़ोर पड़ गयी और यह देश स्वतंत्र हो गये। इन पांचों देशों ने स्वतंत्रता के पश्चात केंद्रीय अमरीका संघ का गठन किया। 
(२)सन् १८५९- पोलैंड के प्रख्यात नेत्र चिकित्सक साहित्यकार व शब्दकोष विशेषज्ञ डॉक्टर ज़ामेनहोफ़ का जन्म हुआ। उन्हें नेत्र चिकित्सा दक्षता प्राप्त थी। और वे कई भाषाओं में निपुण थे उन्होंने संसार के सभी लोगों के बीच एक संयुक्त भाषा खोजने का प्रयास किया। उनका विचार था कि इस मार्ग से राष्ट्रों को एक दूसरे के समीप लाया जा सकता है। डॉक्टर ज़मेनहोफ़ ने अपने ज्ञान और योरोपीय भाषाओं की जानकारी के आधार पर एक विशेष भाषा बनाई जिसका नाम एस्प्रेन्टो है इसका अर्थ होता है आशा। कोई भी व्यक्ति २८ अक्षर और १६ नियम सीखकर सरलता से इस भाषा में बात कर सकता है। और इसे लिख सकता है।
(३)सन् १८९४- चीन-जापान प्रथम युद्ध में पियोंगयांग की लड़ाइ में जापान ने चीन को करारी मात दी।
(४)सन् १९२२- स्मरना अग्नीकांड। संभवतः तुर्की सेना द्वारा १३-१५ सितंबर तक लगाए गए इस आग में स्मरना के अधिकांश हिस्से नष्ट हो गए थे। एक अनुमान के अनुसार इसमें एक लाख लोग मारे गए थे।
(५)सन् १९३१- गांधी-इरविन समझौता।
(६)सन् १९५१- कम्युनिस्ट चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया और दलाइ लामा के मठ में अपने पुजारियों को भेजा।
(७)सन् १९५९- भारत की राष्ट्रीय प्रसारण सेवा दूरदर्शन की शुरुआत।
(८)सन् १९५९- रूसी नेता निखिता खुर्सचेव अमेरिका की यात्रा करने वाली सोवियत संघ की पहली नेता बनी।
(९)सन् १९७१- हरी-भरी और शांति पूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध 'ग्रीन पीस' की स्थापना १२ सदस्यों वाली डॉंट मेक ए वेभ कमिटि द्वारा की गइ।
(१०)सन् १९९१- दक्षिणपूर्वी योरोप में स्थित मेसीडोनिया को योगोस्लाविया से स्वतंत्रा मिली। मेसीडोनिया १५वीं के मध्य में उसमानी सेना के अधिकार में चला गया था और १९वीं शताब्दी के अंत में बुलगारिया से जुड़ गया।

१५ सितम्बर को निम्नलिखित कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के जन्मदिन हैं:-
(१)सन् १८९०- मैरी क्लैरिसा ऐगथा मिलर, इंगलैंड की प्रसिद्ध अंगरेजी उपन्यासकार जो बाद में ऐगथा क्रिस्टी के नाम से मशहूर हुईं।
(२)सन् १९२२- जैकी कूपर, अमेरिकी अभिनेता और निर्देशक
(३)सन् १९०५- डा० रामकुमार वर्मा, भारत प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार

यदि आपको भी सितम्बर माह की १ से १५ तक विभिन्न तिथियों का ऐतिहासिक महत्त्व इसी प्रकार ऐतिहासिक महत्व के सन्दर्भ में कुछ ज्ञात हो तो आप भी हमारा ज्ञानवर्द्धन अवश्य करें....
इतिहास की संपूर्णता असाध्य सी है, फिर भी यदि हमारा अनुभव और ज्ञान प्रचुर हो, ऐतिहासिक सामग्री की जाँच-पड़ताल को हमारी कला तर्कप्रतिष्ठत हो तथा कल्पना संयत और विकसित हो तो अतीत का हमारा चित्र अधिक मानवीय और प्रामाणिक हो सकता है। सारांश यह है कि इतिहास की रचना में पर्याप्त सामग्री, वैज्ञानिक ढंग से उसकी जाँच, उससे प्राप्त ज्ञान का महत्व समझने के विवेक के साथ ही साथ ऐतिहासक कल्पना की शक्ति तथा सजीव चित्रण की क्षमता की आवश्यकता है । स्मरण रखना चाहिए कि इतिहास न तो साधारण परिभाषा के अनुसार विज्ञान है और न केवल काल्पनिक दर्शन अथवा साहित्यिक रचना है । इन सबके यथोचित सम्मिश्रण से इतिहास का स्वरूप रचा जाता है ।
'जय हिंद,जय हिन्दी'

2 टिप्‍पणियां:

  1. मित्रों,
    साहित्य चिरकाल से मनन करते मुनियों की अनवरत् तपस्या का परिणाम है। जैसे-जैसे समय बीतता जाता है,इस अनमोल साहित्य की उपयुक्तता बढ़ती ही जाती है। जीवन की आवश्यकताओं से जूझते व्यक्ति से लेकर, जीवन की सभी आवश्यकताओं से ऊपर उठ चुके व्यक्ति तक,सभी के लिये इस साहित्य में कुछ न कुछ उपलब्ध है।
    आपकी राय और सम्मति हमें सही दिशा निर्देश दे सकेगी ऐसी हमारी आशा है। आप इस यात्रा में अपने और हमारे अन्य मित्रों की तरह सहभागी बनें यह हमारी शुभकामना है।
    धन्यवाद,

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  2. परमादरणीय गुरुदेव,
    अति सुन्दर,सुंदर लेखन।
    आप अच्छा लिखें और आपके शब्द ऐसे ही हमारे दिल को छूते रहें। हमारी शुभकामनाएं हमेशा आपके साथ हैं ।

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