बुधवार, 13 जुलाई 2011

'दोस्ती पर पांच शायरियां(ग़ालिब)'


प्रस्तुत कविताओं के मौलिक स्वरुप में अपनी समझ से कुछ परिवर्तन किये हैं, मौलिक रचनाकार (ग़ालिब की ग़ज़ल और शायरी)से क्षमा मांगते हुए उनके अति सुन्दर और भावपूर्ण विचारों हेतु हार्दिक आभार...........
(१)
जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए !
हमें तो ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,
हमें तो ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी दोस्त का हाथों मे हाथ चाहिए,
चाहें कहूँ ना मै कुछ, लेकिन समझ जाए दोस्त सब कुछ,
दिल मे दोस्त के, अपने लिए केवल ऐसे जज़्बात चाहिए,
उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला दोस्त का रूमाल चाहिए,
मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार दोस्त चाहिए,
अक्सर उलझ सी जाती है जीवन की नाव दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी दोस्त के नाम की पतवार चाहिए,
यह सच है अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर दोस्त चाहिए,
यूँ तो 'दोस्त' का तमग़ा अपने तमाम जीवन के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए |
(साभार)

(२)
दोस्तो की भीड़ मे भी एक दोस्त की तलाश है मुझे
अपनो 
की भीड़ मे भी एक अपने की प्यास है मुझे,
छोड आता है हर कोइ समन्दर के बीच मुझे,
अब डूब रहा 
हूँ तो एक साहिल की तलाश है मुझे,
लडना और जीतना चाहता हूँ  इन अन्धेरो के गमो से,
अब तो बस एक शमा के उजाले की तलाश है मुझे,
अपनी हर ज़िन्दगी में तंग आ चुका हूँ  इस बेवक्त की मौत से मै,
अब 
अपनी इस ज़िन्दगी में एक हसीन ज़िन्द्गी की तलाश है मुझे,
क्या पागल और दीवाना हूँ मै, सब यही कह कर सताते है मुझे,
अब तो बस जो मुझे समझ सके, उस  दोस्त की तलाश है मुझे !!
(साभार)


(३)
दोस्ती तो केवल एक इत्तेफाक़ है,दोस्ती तो केवल दिलो की मुलाकात है,
दोस्ती नही देखती दिन और रात है,
दोस्ती तो सिर्फ वफादारी और ज़ज्बात है,
दोस्त एक साहिल है हरेक तूफानों के लिए,
दोस्त एक आइना 
है अधूरे अरमानों के लिये,
दोस्त एक महफ़िल 
है सभी अन्जानो के लिये,
दोस्ती एक ख्वाहिश 
है आप जैसे दोस्त को पाने के लिये,
ऐ मेरे दोस्त ! हमारी राते गुज़र जातीं 
है,दिन तमाम होता है,
हम ज़िन्द्गी कुछ इस तरह से जीते है, कि हर लम्हा दोस्ती के नाम होता है ||
(साभार)

(४) 
फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,
सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,
सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,
काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती ,
रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,
हमेशा तन्हाई में सहारा है दोस्ती,

हमेशा मझधार में किनारा है दोस्ती,
जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,
हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की,

वरना इस जमीं पर साक्षात् भगवान है दोस्ती ||
(साभार)


(५)
खुशी भी दोस्तो से है, गम भी दोस्तो से है,
तकरार भी दोस्तो से है, प्यार भी दोस्तो से है,
रुठना भी दोस्तो से है, मनाना भी दोस्तो से है,
बात भी दोस्तो से है, मिसाल भी दोस्तो से है,
नशा भी दोस्तो से है, शाम भी दोस्तो से है,
जिन्दगी की शुरुआत भी दोस्तो से है,
जिन्दगी मे मुलाकात भी दोस्तो से है,
मौहब्बत भी दोस्तो से है, इनायत भी दोस्तो से है,
काम भी दोस्तो से है, नाम भी दोस्तो से है,
ख्याल भी दोस्तो से है, अरमान भी दोस्तो से है,
ख्वाब भी दोस्तो से है, माहौल भी दोस्तो से है,
यादे भी दोस्तो से है, मुलाकाते भी दोस्तो से है,
सपने भी दोस्तो से है, अपने भी दोस्तो से है,
या यूं कहो यारो, अपनी तो दुनिया ही दोस्तो से है... ||
(साभार)


'जय हिंद,जय हिंदी'

1 टिप्पणी:

  1. ख्वाब भी दोस्तो से है, माहौल भी दोस्तो से है,
    यादे भी दोस्तो से है, मुलाकाते भी दोस्तो से है,
    सपने भी दोस्तो से है, अपने भी दोस्तो से है,
    या यूं कहो यारो, अपनी तो दुनिया ही दोस्तो से है... ||

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