शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

'इंसानियत से हारा नहीं'



"दुखों और अभावों की तेज़ हवाओं के बावजूद,
मैं ज़िन्दगी से हारा हूँ पर इंसानियत से हारा नहीं |

इन्सान ने अपने दुःख की उर्वरा भूमि को,
अपने आंसुओं से सींचकर कुछ बबूल उगाए,
कभी-कभी उसपर उग आने वाले छोटे-छोटे पीले पुष्प,
हमारी व्यथा के दर्द को कुछ कम कर जाते हैं |
लेकिन एक सच तो यह भी है,
कि बबूल पर उग आये कांटो ने हमेशा,
हर रेशमी दामन को छलनी ही किया है,
और छलनी हुए दामन से आँसू नहीं पोंछे जाते हैं ||
दुखों और अभावों की तेज़ हवाओं के बावजूद,
मैं ज़िन्दगी से हारा हूँ पर इंसानियत से हारा नहीं |"

4 टिप्‍पणियां:

  1. हर रेशमी दामन को छलनी ही किया है,
    और छलनी हुए दामन से आँसू नहीं पोंछे जाते हैं ||
    दुखों और अभावों की तेज़ हवाओं के बावजूद,
    मैं ज़िन्दगी से हारा हूँ पर इंसानियत से हारा नहीं |"

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  2. हमारे परमप्रिय और परमादरणीय गुरुदेव,
    आपकी ओर से 'अभिव्यक्तियाँ बोलती हैं' (http://drmanojjpr.blogspot.कॉम)नामक ब्लौग का विभिन्न विषयों पर अनेक आलेखों से भरपूर अत्यंत उपयोगी तोहफा पाकर मन खुशी से झूम उठा। आपने हमें जो उपयोगी जानकारी और मार्गनिर्देशन दिया है, उसके लिए कोटि-कोटि धन्यवाद। इस संकल्प को दृढ करने हेतु आपका प्रयास निश्चय ही सराहनीय है। मन की गहराइयों को छू लिया है क्योंकि जीवन में हम सतही तौर पर विषय क्षेत्र को देखते हैं, लेकिन वे अनछुए पहलू जिन्हें हम भूल जाते हैं, उन्हें 'अभिव्यक्तियाँ बोलती हैं' ने हमें याद दिलाया है। 'अभिव्यक्तियाँ बोलती हैं' हमारे लिए सर्वोत्कृष्ट उपहार है। इसकी सभी रचनाएं जानकारीपूर्ण हैं। 'अभिव्यक्तियाँ बोलती हैं'(http://drmanojjpr.blogspot.com/) अपने आप में पूरी इनसाइक्लोपीडिया है। 'अभिव्यक्तियाँ बोलती हैं'(http://drmanojjpr.blogspot.com/) नामक आपका ब्लौग हमारे जीवन को सकारात्मक सोच से सतरंगी बनाने की प्रेरणा दे गया। थोडा सचेत प्रयास, थोडी सकारात्मक सोच, थोडी रणनीति के जरिए हम अपनी खूबियों और खामियों को पहचान कर, जीवन में सही संतुलन कायम कर सकते हैं। हमें सफलता का यह मंत्र सिखाने की कोशिश जरूर कामयाब होगी ।

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